Mar 11, 2013

वो तुम नहीं तो कौन था

वो  तुम नहीं  तो कौन था , सपने दिखाकर जो जगा गया,

मेरी खाव्हिशो को उड़ान दी, फिर मेरे पंख  ही चुरा गया,

वो तुम नहीं तो कौन था, दीप रौशनी के जो जला गया,

राह उजियारे की दिखाई फिर हर लौ ही बुझा गया,

वो तुम नहीं तो कौन था, प्रीत का धनी  मुझे जो बना गया,

प्रेम रक्त मुझमे बहाकर फिर रक्त से हीन ही करा दिया ,

वो तुम नहीं तो कौन था, रोते  जो कभी मुझे हँसा गया,

साथ जीने का वचन दिया, फिर पल भर में ही भुला दिया,

वो तुम नहीं तो कौन था,  जिसके लिए मैंने खुद को ही बिसरा दिया,

रोज़ होती है, खड़े होने की कोशिश पर आज फिर तुमने मुझे गिरा दिया,

वो तुम नहीं तो कौन था,  जहाँ  मैंने जिसमे  पा लिया 

फिर उस जहाँ  के  लिए तुमने मुझे ही ठुकरा दिया,

वो तुम नहीं तो कौन था, जिसकी याद ने  अश्कों को आज फिर  भीगा  दिया,

वो तुम नहीं तो कौन था ………………