Jul 8, 2011

GEC REWA's GIRLS HOSTEL


हर एक कमरा एक घर था , टीवी के जैसे different चैनल,

बिना बात की बातो में बनते discussion के कितने पैनल,

न टीवी न कंप्यूटर रेडियो भी पास नहीं था,

पर वक़्त गुजरता ऐसे की वक़्त का अहसास नहीं था,

जाने क्या बाते रहती थी, रात गुज़र जाती थी सारी,

और सुबह कॉलेज की कभी न होती टाइम पे तैयारी,

शपथ हर sem के पहले, इस बार लगा देंगे जी और जान,

पर exam के दस दिन पहले syllabus का करते थे ध्यान,

१२ बजे की birth day पार्टी सुबह ६ बजे तक चलती थी,

वार्डेन के आगे रोज़ किसी न किसी बात पे क्लास हमारी लगती थी,

फिर होता एक शपथ समारोह, जो शाम तक टूट जाता था,

और हमारी बदमाशी का बाँध हरदम छूट ह़ी जाता था,

पानी की होली और बिना कारन होती रोज़ दिवाली,

खाने की छीना छपटी में न जाने टूटी कितनी थाली,

जब मैंने वह कदम रखा था अकेली और अनजान थी,

नए नए से सारे चेहरे , किसी से न कोई पहचान थी,

पर वही था देखा असली रिश्ते बनते, जो साथ ह़ी रोते और साथ ह़ी हँसते,

वो अनजाने अजनबी, न जाने कब मेरे अपने हो गए,

कॉलेज का टेरिस और जागी सारी राते अब सब सपने से हो गए,

शान्ति भवन की विंग में रहती थी तीन वो तिकड़ी,

प्यारा जिसे शोर शराबा , मैं जूही और दीप्ती,

socialized society के हम थे कुछ unspecial और unsocial


चेहरे पे smile आज भी आये, जब याद करू engg का hostel

5 comments:

  1. @gourav: thanks
    @pankaj: thanks pankaj

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  2. Apki hindi pe bahut achi pakad hai. ...sabdo ka tana-bana bahut acha hai

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  3. awesome..hostel k din yaad aa gaye

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