Dec 5, 2010

एक वो कन्धा


एक वो कन्धा, जिस पर सिर रखते ही भूल जाती हू की कही कोई problem है life में, उदास होती हू तो वो कन्धा मेरी negative energy absorb कर लेता है, खुश होती हू तो उल्लास बढाता है,मेरा क्रोध मेरा बचपना सब कुछ सहता है, और कभी शिकायत नहीं करता की अब बस,थक गया है ये तेरा बोझ सहते सहते, अब और नहीं, नहीं शब्द उसके dictionary में ही नहीं है, कभी कभी मैं insomnia से पीड़ित हो जाती हू,पर वो कन्धा एक लोरी की तरह मुझे कब सुला जाता है मैं जान ही नहीं पाती, मेरा बोझ उठाने में उसे कभी तकलीफ नहीं होती, मेरी nonsense, stupid सी बातो का बोझ भी उसे intersting सा लगता है, मेरे mood के हिसाब से वो अपना posture बदलता है, मैं जब चिल्ला कर उस कंधे से सिर हटा लेती हो तो वो बुहत प्यार से मेरे सिर को फिर से सहारा देता है, वो कभी मुझसे कुछ नहीं मांगता, कभी कभी आश्चर्य होता की क्यों वो ऐसा क्यों है, उसका अपना कोई दुःख नहीं, सब कुछ बस मुझसे ही जुडा है, एक वो कंधा जिससे at present मैं दूर हू, बहुत याद आता है..

एक वो कन्धा मेरी "माँ" का