Aug 6, 2010

21st century



Emotions बिकते है अब professionalism की ताक पर,

रिश्तो का है business, society के नाम पर,

commitment का रिश्तो से अब कोई नाता नहीं,

पिरो सके जो एक सूत्र में, ऐसा अब कोई धागा नहीं,

विश्वास की डोर हर रोज़ जुडती और टूटती है,

fantasy land को practical ये दुनिया आये दिन ही लूटती है,

प्यार की definition है अब, emotional अत्त्याचार,

आंसू और मुस्कुराहट, immaturity का है आहार,

जितने हो सके self centered उतने ही mature कहलायेंगे,

दर्द देखा जो किसी और का तो cool attitude कैसे पायेंगे,

I,me,and myself success की अब बस यही राह है,

position और power के रहते , रिश्तो की किसको चाह है,

इंसानियत इंसान से अलग थलग है पड़ी,

यारो इसी का नाम है 21st century ...........

सुप्रिया...........

5 comments:

  1. बहुत खूब काफ़ी अच्छा लिखा है.
    लगता है काफ़ी गुस्सा भरा था.
    पढ़ के खुशी हुई.

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  2. really kafi acchi hai aur sachai hai.aur mai is se sahmat hoon.

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  3. thanks pankaj, but maine gusse me nahi likha

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  4. bahut sahi. sacchai he isme. perfect

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