May 16, 2010

चित्त की व्यथा


रात बीत गयी ये सोचते हुए की रात भर हम क्यों न सो सके,

बेवजह क्यों है इतनी वजह की हम वजह ही न खोज सके,

दूर से दीखता है सब कुछ, पास आने पे सब है मरीचिका,

कभी पानी की प्यास , तो कभी कस्तूरी की तृष्ना,

संतो के साथ किया सत्संग , और कपटी के भी विचार जाने,

दूसरो में खोज रहे है हम जिंदगी के मायने,

पता नहीं किस चीज की तलाश है, क्या है मेरी मंजिल और जाना किस राह है,

जो मिल गया वो नहीं था चाहिए, और चाहत से हम खुद ही अन्जान है,

जीवन का मकसद खो सा गया है, खोज भी अधूरी सी आज है,

स्वप्न है ये जिंदगी या वास्तविकता का झूठा ये जाल है,

कहाँ से की आरम्भ और कहाँ है अंत यात्रा का लक्ष्य भ्रम का ही तो मार्ग है,

चित्त की व्यथा का वर्णन लेखनी के सक्षमता से परे आज है................

supriya...............

5 comments:

  1. Real beautiful,awe-inspiring and wondrous lines.

    keep writing, ...... . This is status of every mind

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  2. sabdo ko kaha se chun le lati ho, great

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  3. sorry sabdo ko kaha se chun ke lati ho

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  4. प्रशंसनीय रचना - बधाई

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