Apr 10, 2010

औरत


एक सपना देखा है अब हमने इन आँखों में,

उड़ेंगे ऊँचा आकाश की बाहों में ,

नहीं जियेंगे किसी सहारे, बन जायेंगे हम खुद ही सहारा,

नहीं चाहिए कोई नाविक, खुद ढूँढेंगे हम अपना किनारा,

देना सीखेंगे उनको, जिन्होंने देना सीखलाया,

नहीं चुनेंगे अब वो मार्ग,जो परिपाटी ने दिखलाया,

अब इन सपनो को हम हकीकत का नाम देंगे,

इस दुनिया में औरत को सिर्फ उसी की पहचान देंगे,

अब न होगी कोई अग्नि परीक्षा, और नहीं चाहिए अब वो राम,

जिसने अपनी ही सीता को भेज दिया वनवास,

अपने नाम के आगे किसी और नाम की नहीं करेंगे तलाश,

खुद ही चुनेंगे अपनी धरा, और अपनी ही शर्तो पे जीतेंगे अपना आकाश......................

supriya.................


5 comments:

  1. good start........supriya
    pr 2nd aur 3rd line se lgta h ki angoor khatte h.

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  2. awesome lines, Touch the sky ,thats my wish

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  3. ग़ज़ब की कविता ... कोई बार सोचता हूँ इतना अच्छा कैसे लिखा जाता है .

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  4. bahut achi kya likhi hai very good umda likha hai

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