Mar 26, 2010

धर्म या कर्म




धर्म ने बाटा जनमत को,भेद धर्म ने सीखलाया,

जाती-पाती में बाट के मानव को, बैर है मन में उपजाया,

नफरत के काटे बोये है,मानवता को भी तार-तार किया,

भाग्य का निर्णय जन्म से करके , निरपराध को कारावास दिया,

नैतिकता को ताक पे रख कर ,उत्पीडन को प्रथा का है नाम दिया,

और कर्म को रखकर अपने पीछे , खुद को प्रबल है इसने मान लिया,

हे मानव छोड़ स्वप्न भरी ये शय्या , उठकर सत्य की गुहार लगा,

और कर्म का विजयपताका, भू के मस्तक पर लहरा,

कर्म का डंका बजने से ही होगा जग का कल्याण,

फिर मानव कर्म से मानव होगा , नाम से न होगी उसकी पहचान...................

supriya.............

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