Mar 16, 2010

खोज


मंदिर पे खोजा उसे और खोजा हर पत्थर पर,
कभी मस्जिद कभी चर्च और कभी गुरद्वारे पर,
भीड़ के साथ भीड़ में खोजा उसे हर तीर्थ स्थल पर,
पर्वतो पे चढकर कभी तो कभी मदीना के भूतल पर,
कभी गीता में कभी कुरान में खोजा उसे हर किताब में,
कभी व्रत में कभी उपवास में और कभी नमाज़ में,
खोजा हर जगह पर कभी न खोजा अपने आप में,
अलग समझता था जिसे वो हर पल था मेरे साथ में,
न मिला धरा पे न मिला गगन में,
खोज जब पूरी हुई तो मिला वो मेरे मन में...............
supriya.................

2 comments:

  1. Well you are far better than what i think really i liked a lot. Great Work.
    i fell i am not wrong to become biggest fan of yours.

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  2. Hey Supriya,
    nicely written [:)]

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