Mar 28, 2010

मोहब्बत


मैं भी कभी हँसा करती थी, किसी से हक़ से लड़ा करती थी,

सपनो की दुनिया से मैं भी कभी जुड़ा करती थी,

लौट आता था सारा बचपन , जब वो डाट कर समझाया करता था,

और फिर गोद में अपने सर रखकर, लाड जताया करता था,

मिट जाती सारी तकलीफे, जब उसकी बाहों में सिमटती थी,

तब दुनिया की सारी खुशिया, मेरे दामन में ही तो बसती थी,

पर झूठा था उसका सारा प्यार, झूठा था सपनो का वो संसार,

झूठे थे उसके सारे वादे, झूठा था उसका हर इकरार,

पर आज भी सच मान उन्हें,इन्तजार किया करती हू,

और आज भी, मैं सिर्फ उन्ही सपनो से प्यार किया करती हू,

जानती हू कुछ नहीं मिलेगा, फिर भी दुआ में उसे ही माँगा करती हू,

अब कभी लडती है किस्मत मुझसे, और कभी मैं किस्मत से लड़ा करती हू,

गम बस इतना है की, उसके आने की आस मरने भी नहीं देती है,

और दर्द के इस मंजर को दुनिया ""मोहब्बत"" कहती है........................

supriya............

7 comments:

  1. Too good .At last a positive hope i liked it.

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  2. kitna dimag chalta hai yarr tumahra

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  3. bas apne aap hi chalta hai aur sirf isime chalta hai.

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  4. mujhe pata nahi tha supriya ka dimag bhi isme chalega

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  5. चर्चे की बात हो गयी
    दिन बीतन में देर ना लगी, खुश-फुश लम्बी बात हो गयी I
    हँसी, ठिठोली, बचपनी बातें, अब सब कुछ जज्बात हो गयी II

    बचपन में ना कोई बोला, अब चर्चे की बात हो गयी I
    मेरे मन की कोई ना जाने, 'वो' जीवन की सौगात हो गयी II

    बिन देखे ना मनवा लागे, लागे दिन में रात हो गयी I
    मिल जाते तो ऐसा लागे, उमस में बरसात हो गयी II

    मेरी हंसी से लोग समझते, 'तुमसे' मुलाकात हो गयी I
    अपना मिलना और बोलना, कौतूहल की बात हो गयी II

    लोग पूछते कब और कैसे, 'प्रेम' की शुरुआत हो गयी I
    मुझे पता भी तभी चला, जब ये चर्चे की बात हो गयी II

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  6. kyo be kiske bare me soch kr likha hai.
    anyway achhi kavita hai isse pdh kr lg rha hai ki tune hi likhi hai.

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