Mar 18, 2010

बेटी

अम्मा कहती थी जब भाई का जन्म हुआ तो खुशिया अपार थी,
और जब जन्मी थी मैं,अम्मा को छोड़ हर चेहरे पे हार थी ,
किताबे बटी थी हमारी , स्कूल भी अलग अलग था,
मैं जाती थी पैदल भाई के लिए तांगा लगा था,
भाई को पढने के बाद खेलने का वक़्त दिया जाता था,
मुझे घर के काम से वक़्त निकाल कर पढने दिया जाता था,
मेरी रोटी में घी नहीं होता था क्योंकि भाई को घी ज्यादा भाता था,
शैतानी करने पे मैं बेहया और भाई नटखट कहलाता था,
अम्मा कहती सीख ले रिश्ते के दर्द को सहना,
बाबा भाई से कहते कभी किसी रिश्ते के आगे न झुकना,
दिन रात दहेज़ जोड़ते बाबा मुझको कोसा करते थे,
पर भाई को कॉलेज स्कूटर से भेजा करते थे,
अरमान था कॉलेज जाने का पढने का और कुछ बनने का,
पर भेजी गयी ससुराल मैं, और छपा फ़िर किस्सा दहेज़ के कारन एक लड़की के जलने का,
पड़े लिखे भाई की कीमत वसूली किसी और के पिता से ,
और इस काल चक्र को सीचा बार बार एक लड़की की चिता से,
दुनिया कहती है कोई भेद नहीं पर भेद वही करती है,
इसीलिए आज भी अजन्मे लड़की गर्भ में ही मरती है..........................
supriya.........................

3 comments:

  1. good one but what i really think this tells about a girl which is 30 years old. not about this generation modern india. this is not covering whole picture of girls dont mind i feel some what conservative.this is i am just commenting on theme. Overall poem is really good.

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  2. Thanks for comments, I agree with u this is not abt modern Indian girl, this is abt rural India where still girls are suffering.

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  3. better to write about what girls had achieved today

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