Jul 19, 2017

कितने ख़ास हो तुम

मेरा एक छोटा सा कोना, आंसू ख़ुशी के हो या गम के उस कोने में ही बहते थे, मेरा बस वही कोना हो तुम,

मुस्कुराहट  के साथ जो नमी थी  आँखों में, मेरा वही हसना और बस वही रोना हो तुम,

अधिकार समझती थी जिसपे, मेरे बचपन के घर का  वो आँगन हो तुम,

कितनी भी मैली , कितनी भी गन्दी, फिर भी जो समेट ले खुद में मुझको,  मेरी  माँ का वो दामन हो तुम,

यकीन था जिस टूटते हुए तारे पे, उस खवाहिश की पहचान  हो  तुम ,

 कैसे इन सब लम्हो से फिर भी अनजान हो तुम,

सुकून देती थी जो सबसे ज्यादा  मेरी वो किताब हो तुम,

बंद तालो में  अनसुलझे  पड़े सवालो   का जवाब हो तुम,

देता है जो खुद से प्यार करने का जज्बा , मेरा वो विश्वास हो तुम,

हर बीते ख़ुशी के लम्हो सा एक अहसास हो तुम,

तुम ही कह दो की मैं शब्दों में  कैसे कह दू की  मेरे लिए "कितने ख़ास हो तुम". 


                       





Jun 24, 2016

वक़्त ने बदली करवट

बेपरवाह बेफिक्र घर में किंग साइज लाइफ मैं जीती थी,

माँ  थमाती जब हाथ में, पानी भी तब ही पीती थी,

 घर से पहुंची हॉस्टल पर आदतों का इलाज कहाँ

drawer में पता नहीं होता था कपडे कहाँ   और किताब कहाँ

पेंसिल भी खरीदनी हो तो roomy साथ में जाया करती थी,

और चाय बनाने के लिए भी किसी न किसी की हेल्प मुझे लगती थी,

पर वक़्त ने बदली करवट और ज़िम्मेदारियों ने घेर लिया,

माँ बनते ही जैसे लापरवाह "सुप्रिया" ने मुंह ही फेर लिया,

१० बजे तक सोने वाली बिना अलार्म के ६ बजे अब उठती है

और breakfast  cook करते करते अब मॉर्निंग हुआ करती है,

हर चीज़ हो अपनी जगह पे इसका ध्यान भी रख लेती है,

and imagine "सुप्रिया" बेटी को discipline का lecture देती है,

लाउडस्पीकर सा शोर मचाने वाली बिटिया को धीरे बोलना सिखलाती है,

लोग सच ही कहते है की "लड़कियां" बहुत जल्दी बड़ी हो जाती है,

"लड़कियां" बहुत जल्दी बड़ी हो जाती  है