Jun 24, 2016

वक़्त ने बदली करवट

बेपरवाह बेफिक्र घर में किंग साइज लाइफ मैं जीती थी,

माँ  थमाती जब हाथ में, पानी भी तब ही पीती थी,

 घर से पहुंची हॉस्टल पर आदतों का इलाज कहाँ

drawer में पता नहीं होता था कपडे कहाँ   और किताब कहाँ

पेंसिल भी खरीदनी हो तो roomy साथ में जाया करती थी,

और चाय बनाने के लिए भी किसी न किसी की हेल्प मुझे लगती थी,

पर वक़्त ने बदली करवट और ज़िम्मेदारियों ने घेर लिया,

माँ बनते ही जैसे लापरवाह "सुप्रिया" ने मुंह ही फेर लिया,

१० बजे तक सोने वाली बिना अलार्म के ६ बजे अब उठती है

और breakfast  cook करते करते अब मॉर्निंग हुआ करती है,

हर चीज़ हो अपनी जगह पे इसका ध्यान भी रख लेती है,

and imagine "सुप्रिया" बेटी को discipline का lecture देती है,

लाउडस्पीकर सा शोर मचाने वाली बिटिया को धीरे बोलना सिखलाती है,

लोग सच ही कहते है की "लड़कियां" बहुत जल्दी बड़ी हो जाती है,

"लड़कियां" बहुत जल्दी बड़ी हो जाती  है

Mar 8, 2016

मम्मा ऑफिस क्यों जाती है

                                        This one is for my daughter "MEETHI"



हाथ में पकडे  ब्रश हर रोज़, सुबह सुबह मम्मा चिल्लाती है,

घडी में बजते 7 है , और 9 वो मुझे बताती है,

भागमभाग में लगी है रहती, हाथ और मुह सब साथ चलाती है,

जल्दी जल्दी भरती टिफ़िन है मेरा, और फिर वही उठ जाओ का नारा लगाती है

हो जा तैयार जल्दी, मीटिंग है मेरी, ये कह कर रोज़ मुझे बहलाती है,

फिर पिंक कलर के मैचिंग जूते और बालो में पिंक ही क्लिप्स पहनाती है,

daycare पहुचाते ही पता नहीं mam को क्या क्या समझा जाती है,

मैं window पे ही खड़ी हू  रहती पर मम्मा आँखों से ओझल होती जाती है,

रूटीन शुरू फिर होता मेरा, mam breakfast के पहले prayer भी कराती है,

और नखरे वाली "मीठी" भी चुप चाप से खाना खाती  है,

खुद से ही सो जाती "मीठी" , और गिरने  पे खुद से ही उठ जाती है,

मीठा बाबू शोना से पल भर में "मीठी" बस "अन्विता" बन जाती है,

सारी ज़िद सारी आनाकानी सब धूमिल सी हो जाती है,

मुझे बस इतना समझ नहीं आता, मम्मा  ऑफिस क्यों जाती है,

मम्मा  ऑफिस क्यों  जाती है. .  . . . .  . . . . . . . . . . . . . . . . . .